ज़िंदगी जब भी लगा
कि तुझे पढ़ लिया ।

तूने अपना एक पन्ना
और खोल दिया ।

(मंजू)

ज्ञान से चलने वाले को शून्य होना पड़ता है,
और
प्रेम से चलने वाले को पूर्ण।

लेकिन
शून्यता और पूर्णता एक ही घटना के दो नाम हैं।
शून्य से ज़्यादा पूर्ण और कोई चीज़ नहीं है,
और
पूर्ण से ज़्यादा शून्य कोई और चीज़ नहीं है।

(नीलम)

फलदार पेड़ों से फल गिरते रहते हैं,
पर
नये नये फल लगते रहते हैं ।
क्यों ?
क्योंकि मोह की जड़ें बड़ी गहरी हैं,
वे लगातार रस भेजती रहतीं हैं;
और
कर्म-फल लगने का सिलसिला टूटता नहीं ।

दो बच्चे देरी से स्कूल पहुँचे ।
कारण !
पहले का सिक्का गिर गया था ।
दूसरा सिक्के पर पैर रक्खे खड़ा रहा था ।
सज़ा दोनों को मिली ।

खोने वाला भी दुखी,पाने वाला भी;
यही तो संसार है !!

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