अपने छोड़ कर क्यों चले जाते हैं ?

जो छोड़ कर चले जाते हैं वे अपने हो ही नहीं सकते ।

( आर.के.गुप्ता )

ज़िन्दगी कभी आसान नहीं होती,
इसे आसान बनाना पड़ता है…

कुछ को स्वीकार करके,
कुछ को नज़र अंदाज करके,
कुछ को बर्दाश्त करके,
और जब तीनों से काम न चले तब प्रतिकार करके ।

जिसे पाकर लगे कि अपने को पा लिया,
समझना कि वह अपना है;
जिसे पाकर लगे कि अपने को खो दिया,
तो मानना कि वह और भी अपना है ।

गुरु मुनि श्री क्षमा सागर जी

( जिसे खो कर लगे कि सब कुछ खो गया,
तो जानना वह सबसे ज्यादा अपना था )

जहाँ तरलता थी, मैं डूबता चला गया ;
जहाँ सरलता थी, मैं झुकता चला गया ;

संवेदनाओं ने मुझे जहाँ से छुआ,
मैं वहीं से पिघलता चला गया ।

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April 8, 2022

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