जो इंसान “खुद” के लिये जीता है ,उस का एक दिन “मरण” होता है ,
परंतु जो इंसान “दूसरों” के लिये जीता है ,उस का हमेशा “स्मरण” होता है ।

(आर.के.गुप्ता)

मनुष्य का अपना क्या है..!?

– जन्म : दूसरों ने दिया,
– नाम : दूसरों ने रखा,
– शिक्षा : दूसरों ने दी,
– रोजगार : दूसरों ने दिया,
और . . .
– शमशान : दूसरे ले जाऐँगे.

-तो व्यर्थ मेँ घमंड़ किस बात पर करते हैँ लोग ??

(श्रीमति एकता – पुणे)

अंग्रेज़ ने पूछा:
भारतीय स्त्रियाँ हाथ क्यों नहीं मिलाती हैं?
स्वामी विवेकानंद जी ने जवाब दिया…
क्या आपके देश में कोई साधारण व्यक्ति
आपकी महारानी से हाथ मिला सकता है ??
अंग्रेज़- “नहीं”
स्वामी विवेकानंद-
हमारे देश में हर एक स्त्री महारानी होती है।

बारिश की बूँदें, भले ही छोटी हों, लेकिन उनका लगातार बरसना बड़ी बड़ी नदियों का बहाव बन जाता है.
ऎसे ही हमारे छोटे छोटे और अच्छे प्रयास निश्चित ही ज़िंदगी में बड़ा परिवर्तन लाने में सक्षम होते हैं ।

(अभिषेक-ग्वालियर)

इस मार्च एन्डिंग में, जीवन की बैलेंस शीट जांचने की इच्छा हुई,
तो पाया कि प्रेम,स्नेह,आत्मीयता,भाईचारा और कर्तव्यनिष्ठा के खाते ही गायब हैं।

मन के ‘मुनीम’से पूछा तो वो बोला –
सर जी, वर्षो से इनके साथ कोई लेनदेन हुआ ही नहीं।
ना जाने कितने रिश्ते ख़त्म कर दिये इस भ्रम ने-
कि मैं ही सही हूँ,
और सिर्फ़ मैं ही सही हूँ….!!

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