How can You “SM_LE”
without “I” ?

How can You be
“F_NE” without
“I” ?

How can You
“W_SH”
without
“I” ?

How can You be
“FR_END”
without “I” ?

“I” am very important!

But this ‘ I ‘ can never achieve S_CCESS without all of ‘U’ ……
and
that makes ‘U’ more important than ‘I’.

(Divya – London)

संसार का रास्ता रेत के टीले पर से जाता है,
पैर रखना आसान लेकिन पैर धसते जाते हैं |
हवाओं के रुख के साथ शिखर(मंज़िल) भी बदलते रहते हैं ।

मोक्ष-मार्ग पथरीला है, कठिन पर आधार और शिखर अचल ।

संसार में कुंदन भी कुंद होता जाता है,
मोक्ष-मार्ग में कुंद भी कुंदन ।

जंगल में हर रोज सुबह होने पर हिरण सोचता है कि मुझे शेर से ज्यादा तेज भागना है, नहीं तो शेर मुझे मार के खा जायेगा। और शेर हर सुबह उठ कर सोचता है कि मुझे हिरण से तेज भागना है, वरना मैं भूखा मर जाऊंगा।

आप शेर हो या हिरण, उससे कोई मतलब नहीं है। अगर आप को अच्छी ज़िंदगी जीनी है, तो हर रोज़ भागना पड़ेगा।

“संघर्ष के बिना कुछ नहीं मिलता है।”

(श्रीमति एकता – पुणे)

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