रस्सी दो लड़ों को बेल कर बनती है ।
ये दो लडें हैं ,राग व द्वेष की ।
ऐसी रस्सी हमको संसार/दु:खों से बांधकर रखे है ।

चिंतन

धर्माचरण का उद्देश्य पाप काटना हुआ तो फल आधा मिलेगा,
पाप त्यागने का उद्देश्य हुआ तो फल पूरा तथा तुरंत शुरू ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

कोरा ज्ञान अच्छा नहीं माना जाता ।
क्यों ?

कोरा कपड़ा नहीं पहना जाता, धुलकर ही पहनने लायक होता है ।

ज्ञान चारित्र/अनुभव से जब धुल जाता है/ परिष्कृत हो जाता है, तब उपयोगी बन जाता है ।

चिंतन

लंका विजय के बाद श्री राम सबको दो पद (राजा/मंत्री) दे रहे थे ।
हनुमान ने भी दो पद माँगे, वे पद थे – श्री राम के दो पद ।

जिसने गुरू/भगवान के दो पद पालिये, उसे संसार के सारे पद मिल जाते हैं, वह परमपद को प्राप्त कर लेता है ।

आर्यिका श्री विनतमति माताजी

हर चक्की वाला अपनी चक्की सप्ताह में एक दिन बंद रखता है, तुम अपनी चक्की हर दिन, हर समय क्यों चलाते रहते हो ?

आचार्य श्री विद्यासागर जी

आचार्य श्री विद्यासागर जी कभी भी अपने शिष्यों की गलतियों को बताते नहीं, सिर्फ इशारा कर देते हैं ।
शिष्य खुद गलती स्वीकार कर प्रायश्चित माँगें, तब देते हैं ।

वादविवाद में अटकन है/ठहराव है,
भक्ति में गति ।
जिसके प्रति भक्ति की जायेगी, गति वहीं तक होगी जैसे दुकान के प्रति तो वहाँ तक, भगवान के प्रति तो मंदिर तक, रागी के प्रति तो उस व्यक्ति तक, असीम/वीतरागता के प्रति तो मोक्ष तक ।

चिंतन

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April 8, 2022

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