ऐसा नहीं है कि..
ज़िंदगी बहुत छोटी है,
दरअसल..हम जीना ही,
बहुत देर से शुरू करते हैं ।

(ब्र. संजय)

”इंसान ने वक़्त से पूछा…
“मै हार क्यूं जाता हूँ ?”
वक़्त ने कहा..
धूप हो या छाँव हो,
काली रात हो या बरसात हो,
चाहे कितने भी बुरे हालात हो,
मै हर वक़्त चलता रहता हूँ,
इसीलिये मैं जीत जाता हूँ,
तू भी मेरे साथ चल,
कभी नहीं हारेगा I

श्री जगजीत सिंह

शरीर में तीन अंग सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं –

  • पेट – ठीक रखने के लिये शुद्ध आहार
  • दिमाग – ठीक रखने के लिये शुद्ध विचार
  • दिल – ठीक रखने के लिये सद्भाव

चिंतन

पहलवान में सामर्थ, साधारण से बहुत ज्यादा, पर डरपोक ।

हम सब में भगवान जैसा बनने की शक्ति नहीं है क्या ?
पर डरपोक हैं, मोक्षमार्ग पर चलने का साहस नहीं है ।

चिंतन

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April 8, 2022

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