जीव का स्वभाव यदि छोड़ना नहीं है, तो पकड़ना भी तो स्वभाव नहीं है ।

ब्र. नीलेष भैया

एक ही शरीर में तीन अलग अलग आदतें हैं –
सबसे ज्यादा सर्दी लगती है छाती को,
उससे कम हाथ पैरों को,
और सबसे कम मुँह को ।

जैसी आदत ड़ालो वैसी पड़ जाती है ।

चिंतन

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