भोजन के अंत में सफेद चावल आते हैं तब भोजन समाप्त हो जाता है ।
सफेद बालों के आ जाने पर तो भोगना समाप्त कर दो ।

मुनि श्री महामंत्रसागर जी

जो बच्चे कक्षा में बार बार फेल होते हैं, उन्हें उसी कक्षा में बार बार रहना परता है ।
यदि हम कर्मोदय में बार बार फेल हो रहे हैं तो मान लें – हमारा संसार में बार बार आना निश्चित है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

युद्ध में राम जाते थे तो भावना जीतने की रहती थी, हराने की नहीं ।
इसीलिये वे कर्मों को जीतकर भगवान बन गये ।
साधारण योद्धा, हराने के लिये युद्ध करता है कभी हारता है, कभी जीतता है पर मोक्ष नहीं जाता ।

चिंतन

व्यवसाय में पहले पैसा लगाते हो, मेहनत करते हो, तब फायदा होता है ।
बैंक में पैसा जमा करते हो, तब व्याज मिलता है ।
बिना पुरुषार्थ किये, गुरू/भगवान की कृपा की अपेक्षा क्यों करते हो ?

चिंतन

थोड़े से, क्षणिक सांसारिक सुख के बदले में अनंत/शास्वत आत्मिक सुख को छोड़े/भूले हुये हैं ।
ऐसा ही है जैसे मंज़िल के रास्ते में थोड़ी सी पेड़ की छांव के लिये मंज़िल पहुँचने का इरादा भूल गये हैं ।
चिल्लर के चक्कर में खजाना छोड़ रहे हैं ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है ।
जैसी संगति वैसे बनोगे ।
मंदिर जाओगे भगवान जैसे, गुरूओं की सेवा में रहोगे त्याग/संयम के भाव बनेंगे ।

मुनि श्री विश्रुतसागर जी

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