With TRUST even silence is understood.
Without TRUST every word is misunderstood.

(Mr.Deepak Jaiswal)

ईश्वर ने हमारे शरीर की रचना कुछ इस प्रकार की है,
कि ना तो हम अपनी पीठ थपथपा सकते हैं और ना ही स्वयं को लात मार सकते हैं ।
इसके लिए हमारे जीवन में मित्र होने जरुरी हैं ।

(श्रीमति दिव्या जैन-लंदन)

हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली,
कुछ यादें मेरे संग ….. पांव पांव चलीं !
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ,
वो ज़िंदगी ही क्या… जो छाँव छाँव चली !!

(श्री तुषारभाई- मुम्बई)

Bathroom में गिरते समय Switch board का सहारा लिया ।

Switch board का ?
जो खुद Mechanic के सहारे रहता है !
जो घातक झटके देता है !!

जीवन में हम उन्हीं को सहारा बनाते हैं, जो खुद बेसहारा हैं,
जो जीवन भर हमको घातक झटके देते रहे हैं !!!

चिंतन

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