वैराग्य आने में चार प्रतिबंध होते हैं ।

  • लोक – लोग क्या कहेंगे,
  • स्वजन – लेने नहीं देते,
  • शरीर – कमजोर है,
  • संकल्प/विकल्प – संयास लिया तो, ऐसा होगा, तो क्या होगा ।

श्री कल्पेश भाई

सचिन तेंदुलकर के 200 वें अंतिम टेस्ट मैच के समय एक संस्मरण सुनाया गया –
पाकिस्तान के साथ एक मैच में उनके बैट्समैन जावेद मियाँदाद ने बॉलर से पूछा कि तेरा रूम नं. क्या है ?
उसने ज़बाब नहीं दिया ।
हर बॉल के बाद मियाँदाद वही प्रश्न करता था और बॉलर कोई ज़बाब नहीं देता था ।
मैच पूरा होने के बाद बॉलर ने पूछा कि मेरा रूम नं. क्यों पूछ रहे थे ?
मियाँदाद ने कहा – मुझे ऐसा सिक्स मारना था जो तेरे रूम के काँच तोड़ देता ।

जाहिर है बॉलर उलझा नहीं, बैट्समैन सिक्स मार पाया नहीं और इंड़िया जीत गया ।
तेंदुलकर किसी से उलझते नहीं/रियेक्ट नहीं करते हैं, बस अपनी मंज़िल की तरफ निरंतर बढ़ते रहते हैं ।

पहाड़ों पर पानी दिखता नहीं है, पर सब मीठे पानी की नदियाँ वहीं से निकलती हैं ।
समुद्र में पानी ही पानी है पर प्यास बुझाने के लिये एक बूँद पानी भी नहीं है (सांसारिक सुख) ।
इसी प्रकार धर्म भी दिखता नहीं है पर प्यास बुझाता है, शीतलता देता है ।

मुनि श्री उत्तमसागर जी

भगवान की मूर्तियों के आसपास देवी देवताओं की सुंदर सुंदर मूर्तियाँ/सजावट होती है ।
यदि उनमें अटक गये तो मुख्य भगवान की छवि से दूर हो जाओगे/भटक जाओगे ।

चिंतन

भगवान की पूजा से फायदे वैसे ही हैं जैसे नदी में नहाना ।
मैल (पाप) दूर होता है, (जितनी तल्लीनता से करोगे, उतना ज्यादा मैल निकलेगा )।
शीतलता (पुण्य) मिलती है,
पवित्रता (कर्मनिर्जरा/झरते हैं) आती है ।

श्री सुभाष भाई

कर्म उदय आने पर हमारी सोच को प्रभावित कर देता है ।
पुण्यकर्म का उदय आने पर सोच अच्छी हो जाती है और पापोदय आने पर सोच खराब हो जाती है ।

पं. रतनलाल जी बैनाड़ा

ज़िंदगी में दो चीज़ें हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं :
“सांस” और “साथ”
“सांस” टूटने से तो इंसान 1 ही बार मरता है;
पर किसी का “साथ” टूटने से इंसान पल-पल मरता है।

(श्रीमति नीलम जैन – दिल्ली)

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