दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी है।
जैसे:
दरिया – खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ – खुद अपना फल नहीं खाते।
फूल – अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मालूम है क्यों?
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असली ज़िंदगी है।

(श्रीमति नीलम जैन – दिल्ली)

इंसान को कभी भी घमंड़ नहीं करना चाहिये, क्योंकि शतरंज की बाजी खत्म होने के बाद राजा और मोहरे एक ही ड़िब्बे में रख दिये जाते हैं ।

(श्री दीपक जैसवाल – ग्वालियर)

छाता बारिश को तो नहीं रोक सकता, परन्तु बारिश में खड़े होने का हौसला अवश्य देता है ।
इसी प्रकार आत्मविश्वास सफलता की गारंटी तो नहीं देता, परन्तु सफलता के लिये संघर्ष करने की प्रेरणा अवश्य देता है ।

हर ख़ुशी है लोगों के दामन में,
पर एक हंसी के लिये वक़्त नहीं |

सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं |

सारे नाम मोबाइल में हैं,
पर दोस्ती के लिये वक़्त नहीं |

आखों में है नींद भरी,
पर सोने का वक़्त नहीं |

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े,
कि थकने का भी वक़्त नहीं |

तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
इस ज़िन्दगी का क्या होगा |
कि हर पल मरने वालों को,
जीने के लिये भी वक़्त नहीं |

GOD

Do you agree that we have 26 alphabets in English, as given below

A = 1 ; B = 2 ; C = 3 ; D = 4 ;
E = 5 ; F = 6 ; G = 7 ; H = 8 ;
I = 9 ; J = 10 ; K = 11 ; L = 12 ;
M = 13 ; N = 14 ; O = 15 ; P = 16 ;
Q = 17 ; R = 18 ; S = 19 ; T = 20 ;
U = 21 ; V = 22 ; W = 23 ; X =24 ;
Y = 25 ; Z = 26.

With each alphabet getting a number, in chronological order, as above, study the following, and bring down the total to a single digit and see the result yourself

Hindu –
S h r e e K r i s h n a
19+8+18+5+5+11+18+9+19+8+14+1=135=9

Muslim –
M o h a m m e d
13+15+8+1+13+13+5+4=72=9

Jain –
M a h a v i r
13+1+8+1+22+9+18=72=9

Sikh –
G u r u N a n a k
7+21+18+21+14+1+14+1+11 =108 =9

Parsi –
Z a r a t h u s t r a
26+1+18+1+20+8+21+19+20+18+1=153=9

Buddhist –
G a u t a m
7+1+21+20+1+13=63=9

Christian –
E s a M e s s i a h
5+19+1+13+5+19+19+9+1+8=99=18=9

Each one ends with number 9

THAT IS NATURE’S CREATION TO SHOW THAT GOD IS ONE !!!

(Ms. Namita – Surat)

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