बच्चों के हाथ से ज़हर हटा दिया तो क्या उनको मरण से आजाद कर दिया ?
यदि ज़हर की जगह हथेली पर स्मैक रख दिया तो क्या बच्चे मरण से स्वतंत्र हो गये ?
नहीं अब तो घुट घुट कर मरेंगे ।

मुनि श्री मंगलानंद जी

विदेशियों से तो आजादी मिल गई, स्वदेशियों* से कब मिलेगी ?

  1. *अपने लोग जो भ्रष्टाचार रूपी स्मैक खाने का प्रचलन बढ़ा रहे हैं ।
  2. *अपने लोग जो मोह रूपी स्मैक खा/खिला रहे हैं ।

हिटलर ने थोड़े समय ड़राया, सालों राज्य किया ।
हम भी यदि ग्रहों/रागी देवी देवताओं से ड़र गये तो ज़िंदगी भर वे हम पर राज्य करते रहेंगे,
हो सकता है जन्मजमांतरों तक ।

ब्र. नीलेश भैया

आचार्य श्री विद्यासागर जी को उनके गुरू आचार्य श्री ज्ञानसागर जी जब 22 साल की उम्र में दिगम्बर मुनि बना रहे थे तब समाज वाले उनके पास समझाने पहुँचे कि इतनी कम उम्र में दीक्षा न लें ।
आचार्य श्री – वैराग्य तो अंतरंग प्रक्रिया है जो हो चुकी है, अब तो बाह्य औपचारिकता रह गयीं हैं ।

गांधी जी एक गाल पर थप्पड़ खाने के बाद दूसरा गाल इसीलिये आगे कर देते थे, क्योंकि वे जानना चाहते थे कि मेरे पाप का उदय समाप्त हुआ या नहीं ।

मुनि श्री विनिश्चयसागर जी

मैत्री भाव जगत में मेरा सब जीवों से नित्य रहे
दीन-दु:खी जीवों पर मेरे उरसे करुणा स्रोत बहे,
रहे भावना ऐसी मेरी, सरल-सत्य-व्यवहार करूँ
बने जहाँ तक इस जीवन में औरों का उपकार करूँ।

किसी का ये सोचकर साथ मत छोड़ना कि उसके पास कुछ नहीं है तुम्हें देने के लिये,
बस ये सोचकर साथ निभाना कि उसके पास कुछ नहीं तुम्हारे सिवा खोने के लिये ।

(श्री ब्रजेश)

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