हम ईमानदारी निभा नहीं पाते, सो ईमानदारी की परिभाषा ही अपने अपने अनुसार बदल लेते हैं ।
धर्मानुसार चल नहीं पाते, सो धर्म का रूप अपने अपने अनुसार बदल लेते हैं ।
चिंतन
हमारे मुनिराज धन ना होने पर भी निर्धन नहीं हैं, अपितु रत्नत्रयी* रूपी धन से धनी हैं ।
(श्रीमति रिंकी)
॰ सच्चे देव गुरू तथा शास्त्रों के प्रति पक्की श्रद्धा
Love gives nothing but itself and takes nothing but from itself.
Love possesses not, nor would it be possessed.
Love has no other desire but to fulfill itself.
Love one another but make not bond of love.
Sri Khaleel Gibran (Mr. Gaurav)
जो स्वंय से असंतुष्ट हों वो दूसरों को कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकते हैं ।
सब्र और सच्चाई एक ऐसी सवारी है, जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती,
ना किसी के कदमों में और ना किसी की नज़रों में ।
Life is not qualified by the branded clothes you wear or fluency of english you speak.
It is measured by the number of people who smile when they hear your name..
(Mr. Sanjay)
सागर असीम है पर हमें उतना ही पानी मिलता है, जितनी हमारी हथेली है,
ईश्वर की कृपा भी असीम है, पर उतनी ही मिलेगी जितनी हमारी श्रद्धा होगी |
(धर्मेंद्र)
ज्ञान धर्म के लिये है,
धर्म ज्ञान के लिये नहीं ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
Sometimes….
You have to pretend that you are happy & fine…
Until you realize that your pretensions have become your STRENGTH to move on….!
(Mr. Sanjay)
जितनी उपेक्षा करोगे उतनी सुख,शांति पाओगे ।
इसका अर्थ यह नहीं कि घर वालों से संबंध ही छोड़ दें, उनसे बस मोह कम कर दें/ उनसे मूर्च्छा न रखें ।
क्षु. श्री गणेशप्रसाद वर्णी जी
मुस्कराहट वो हीरा है, जिसे आप बिना खरीदे पहन सकते हैं,
और जब तक ये हीरा आपके पास है, आपको सुंदर दिखने के लिये किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है ।
(श्रीमति रिंकी)
A soft nature of a person doesn’t imply his weakness..
Remember nothing is softer than water,
But it’s force can break the strength of rocks…
(Dr. S. M.Jain)
जीवन मज़े के लिये नहीं, कर्तव्य पूरे करने के लिये है ।
यह दूसरी बात है कि कर्तव्य पूरे करने वाले को ही असली मज़े आते हैं ।
चिंतन
वर्तमान मे जीना ही समझो “मन का स्थिर होना है” ।
आचार्य कहते हैं… सारी योजनायें छोड़ दो, मात्र वर्तमान का अनुभव करो ।
जो वर्तमान का उपयोग करेगा, वह अवश्य ही आगे चलकर वर्धमान बनेगा ।
(श्री संजय)
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments