धर्म जब आरामतलबी की ओर बढ़ने लगता है, तब अधर्म की ओर मुँह कर लेता है ।
चिंतन
We can only lose something that we have,
but we can not lose something that we are.
(Mr. Sanjay)
एक सत्संगी भाई ने सपना देखा – एक गुंड़े ने उनकी ज़ेब से धूप का चश्मा निकाल लिया ।
उनकी आंख खुल गयी, वे विचार करने लगे और चश्मे का त्याग कर दिया ।
धर्म की राह पर चलने वाला धर्म की फुहार से भीगना चाहिये ।
यदि भीग ना पाये तो कम से कम ठंड़ी ठंड़ी बयार का अनुभव तो होना ही चाहिये ।
Secrets of Good Life :
Minimum requirements and maximum adjustments are the two steps of happy & successful Life.
(Dr. S. M. Jain)
समय, सत्ता, सम्पत्ति और शरीर सदा साथ नहीं देते पर,
सम्भाव, समझदारी, सत्संग और सच्चे साथी.. सदा साथ देते हैं ।
(श्री संजय)
पहली बार टी.वी. सीरियल देखने पर मन नहीं लगता क्योंकि आप ना तो किरदारों को जानते हैं, ना कहानी । पर लगातार देखते रहने पर फिर छोड़ा नहीं जाता ।
धर्म को पढ़ो, जानो – मन जरूर लगेगा, जब फ़ायदा दिखने लगेगा ।
चिंतन
Help everyone in a way that even God will wonder whether, I “Created” this person or he is the one who is “Recreating” me on the Earth.
(Mr. Sandeep Mawkin)
पानी पहाड़ से हमेशा नीचे की ओर ही बहता है, तभी सबकी प्यास मिटाता है/पुजता है ।
मनुष्य क्यों गर्दन ऊपर करके चलता है ?
ठोकरें खाता है, फिर भी नहीं सीखता !!
- ना हिंसा करो, ना वार करो, ना अच्छे काम से इंकार करो ।
करना है अगर तो सबसे प्यार करो,
प्रेम का अमृत पीने दो, “जियो और जीने दो” ।
Happy 2612 th Mahaveer Jayanti
(Dr. S. M. Jain)
- सत्य अहिंसा और प्रेम से बस इतना नाता मत रखना,
दिवालों पर लिख करके, दीवाली पर पोत ना देना ।
(श्रीमति मनीषा – ग्वालियर)
- भगवान महावीर कभी के लिये नहीं,
अभी के लिये हैं,
और सभी के लिये हैं ।
Have A Great Mahaveer Jayanti.
Jai Jinendra
(धर्मेंद्र)
People spend time for earning money and the same money is spent for spending time…!
Think about it.
(Dr. Nikita)
धर्मी – जो धर्म का प्रयोग अपने पर करता है ।
अधर्मी – जो धर्म का प्रयोग दूसरों पर ही करता है ।
धर्मात्मा = धर्म + आत्मा
पं.श्री रतनलाल बैनाड़ा जी
हमारे तो लगावों के तारों में भी गांठें हैं,
वे गांठे कब खुल जायेंगी, इसका भय बना रहता है ,
तभी तो हम अपने बेटे/पत्नी का नाम Fix Deposit में नहीं ड़ालते, अपने नाम से कराते हैं ।
ब्र. नीलेश भैया
The world’s hunger is getting ridiculous.
There is more fruit in a rich man’s shampoo than on a poor man’s plate.
(Mrs. Shuchi Jain)
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