शरीर तो खेत है,
मन, वचन, कायरूप जैसे बीज इसमें ड़ालोगे, वैसी ही फसल आयेगी ।

चिंतन

जो नाव मुझे
उस पार ले जायेगी,
एक दिन,
उस पार पहुंचकर,
उसे भी छोड़ना होगा ।
ये जानते हुये भी,
मन
नाव से
कितना बंध जाता है !

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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April 8, 2022

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