It is not the strongest of the species that survives, not the most intelligent,
it is the one that is most adaptable to change.

(Dr. S. M. Jain)

“गलती” जीवन का एक पन्ना है, पर “रिश्ता” पूरी किताब है ।
जरूरत पड़ने पर गलती का पन्ना फाड़ देना लेकिन एक पन्ने के लिये पूरी किताब मत खो देना ।

(श्री मनीष – ग्वालियर)

कोई किसी के लिये नहीं रोता ।
रोते हैं, अपने राग के कारण ।

ज्ञानी के परिवारजनों का भी विछोह होता है, वह क्यों नहीं रोता ?

क्योंकि उसके राग कम होता है ।

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

अच्छी चीज़ पर भी अड़ना नहीं चाहिये ।
क्यों नहीं ?
यदि अड़ गये तो उससे भी अच्छी चीज़ कैसे मिलेगी !!

हमेशा ऊपर जाने के दरवाजे खुले रखें ।
वर्तमान कितना भी अच्छा क्यों ना हो, ऊपर उठने की संभावनायें बहुत रहती हैं, पर अड़ियल की प्रगति बंद हो जाती है ।

ड़ॉ. एस. एम. जैन

हमारे जीवन में ख़राब समय आता क्यों है ?

क्योंकि हम समय ख़राब करते रहते हैं ।
आत्मकल्याण के लिये जो समय मिला था, उसे विषयभोगों में बर्बाद करते रहते हैं ।

चिंतन

क्या बीमार आदमी को झोंपड़ी से निकालकर महल में लाने से, वह निरोगी हो जायेगा ?
क्या कांच को सोने की अगूँठी में जड़वाने से, वह हीरा बन जायेगा ?

जब तक अंदर की कलुषता नहीं जायेगी, शांति आ नहीं सकती ।

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