जार्ज वर्नाड़ शा के भाषण समाप्त होने पर, एक महिला ने आकर भाषण को सराहा पर शिकायत की – आप बीच बीच में अपनी पेंट को बार बार ऊपर कर रहे थे, वह बहुत बेहूदा लग रहा था ।
जार्ज वर्नाड़ शा – यदि पेंट को ऊपर नहीं करता तो और भी बेहूदा दिखता ।

(ड़ा. एस. एम. जैन)

वनस्पति घी खरीदते समय पूँछते हैं – यह असली तो है ना ?
नकली को असली मानने लगे हैं, क्योंकि आदत पड़ गयी है ।

हम भी मोह में संसार को अपना हितैषी मानने लगे हैं, असली यानि भगवान/धर्म को नहीं ।

चिंतन

धर्म की कुछ बातों पर विश्वास नहीं होता !
Homoeopathy पर जो लोग विश्वास नहीं करते वे भी दवा तो लेते हैं और रोग भी दूर होता है ।
दवा लेते रहें तो विश्वास भी आने लगेगा ।
जब विश्वास हो जायेगा तो रोग में फायदा भी ज्यादा होगा ।

चिंतन

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April 8, 2022

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