प्रकृति का हर काम मंद/सहज है, पर कुछ भी miss नहीं होता ।
हमारा हर काम तेज/हड़बड़ी में होता है, इसलिये हम आवश्यक काम भी miss कर जाये हैं ,
धर्म, परोपकार, कर्तव्य आदि ।

चिंतन

भगवान के दर्शन करने नहीं, भगवान में अपने दर्शन करने के लिये जाना चाहिये ।
औषधि इसलिये ली जाती है ताकि आगे औषधि ना खानी पड़े ।
भक्ति, भक्ति छोड़ने के लिये ।

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

लहर नई हो सकती है,लहर पुरानी भी हो सकती है, परन्तु सागर न तो नया है ना पुराना।
बादल नये हो सकते है, पुराने भी हो सकते हैं ,परन्तु आकाश ना तो नया है ना पुराना ।

‘सत्य भी नया या पुराना नहीं होता ।
सत्य सनातन है, शास्वत है, सदा है ।
सत्य न तो जन्म धारण करता है, ना पुराना होता है और न नष्ट होता है

श्री सुज्ञान मोदी- नोयड़ा

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