अनु = कम,
जो भवों को कम करने में सहयोग करे वह अनुभव ।

श्री लालमणी भाई

हम कितने होशियार हैं – हमने ज्ञान को पुस्तक में, काल को घड़ी में और अमूर्तिक को मूर्तिक में बदल लिया है ।
हम मूर्तिक के आदी हैं, इसलिये सबको मूर्ति के रूप में ही देखना चाहते हैं ।

आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी

मंदिर का निर्माण कारीगर ऊपर चढ़कर ही करता है ।
चारित्र की सीढ़ी पर चढ़े बिना, व्यक्तित्व (धर्म) का निर्माण संभव नहीं है ।

आर्यिका श्री ज्ञानमति माताजी

धर्म तो सत्य है ही, फिर धर्म के आगे ‘सत्य’ लगाने की क्या ज़रूरत है ?
क्योंकि आज असत्य को भी धर्म कहने लगे हैं ।

आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी

मुनि श्री पावनसागर जी का आहार पिछले 11 दिनों से नहीं हुआ है ।
मुनि श्री अहमदाबाद में हैं, उनकी विधि (नियम) नहीं मिल रही है ।
आप से जिस रूप में बन सके मुनि श्री के प्रति शुभ भावनायें प्रबल करें ।

तेरहवें दिन महाराज श्री की क्रिया/विधि ( 3 दंपत्ति मुकुट बांधे, हाथ में तीन तीन कलश लिये हुये खड़े हों ) मिल गई और आहार निर्विघ्न संपन्न हुये ।

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031