यदि महाभारत में युधिष्ठर झूठ  नहीं बोलते तो शायद महाभारत समाप्त नहीं होता ।
गृहस्थों के लिये अच्छे उद्देश्य से झूठ बोलना युक्त्ति संगत है ।

चिंतन

हम सब पाँच गेंदों को हवा में उछाल उछाल कर खेल रहे हैं ।
इन गेंदों के नाम हैं – व्यवसाय, परिवार, स्वास्थ, मित्र और नैतिकता ।
व्यवसाय की गेंद तो रबड़ की है, गिर भी गयी तो फिर उछल कर हाथ में आ जायेगी ।
पर बाकी चारौं गेंदें, काँच की हैं – एक बार हाथ से छूटीं तो टूट जायेगीं, फिर जुड़ नहीं पायेंगी ।
व्यवसाय/नौकरी के लिये बाकी चारौं को टूटने मत देना ।

वैभव और सफलता, मेहनत और ज्ञान से ही नहीं मिलती,
वरना मज़दूर और पंड़ितों के पास होतीं ।
इनके मिलने का मुख्य कारण है – पुण्य

मुनि श्री तरुणसागर जी

( ये अलग बात है कि आज का पुण्य, पिछ्ले पुरूषार्थ का ही फल है )

बुद्धू राजकुमारों को पढ़ाने के लिये पंचतंत्र की कहानियों की रचना की गयी थी ।
हमको पढ़ाने के लिये महाभारत, रामायण आदि प्रथमानुयोग के ग्रंथ लिखे गए।
क्योंकि हम भी राजकुमारों जैसे बुद्धू ही हैं, जानते हुये भी कि संसार दु:ख का कारण है, उसे बढ़ाते ही जाते हैं ।

चिंतन

जानवरों की सामर्थ्य मुँह से भोजन करने की है,
और मनुष्य की सामर्थ्य हाथों से ।
मनुष्य होकर भी यदि कोई सीधा मुँह से ही भोजन करे तो क्या यह उचित होगा ?

श्री लालमणी भाई

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