विजय के बाद अपने घर की वापसी के महोत्सव को श्री राम और महावीर भगवान की तरह हम भी अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त करके, उल्लास के साथ मनायें ।
दीपमालिका सबके जीवन में शांति और आनंद का प्रकाश भर दे ।

चिंतन

क्या आप करोड़ों इंसानों को आग में जला कर तड़पा-तड़पा कर मारना चाहेंगे ?
नहीं ना ।
तो आप उन करोड़ों जीवों को क्यों नहीं महसूस करते जो इस दिवाली पर आपके द्वारा मारे जायेंगे ?
जीव सब समान हैं, बस रूप अलग अलग हैं ।

पटाखों का इस्तेमाल ना करें, इनसे वायु तथा ध्वनि प्रदूषण भी बहुत फैलता है ।

जियो और जीने दो !

(श्री आशीष मणी जैन)

हीनता का भाव भी अहंकार पैदा करता है ।
दूसरे के सम्मान में अपना अपमान मानना भी अहंकार है ।

मुनि श्री क्षमासागर जी

शास्त्रों के अनुसार पत्नी अनुगामिनी होती है,
पर आजकल तो देखा जाता है कि पति पत्नी को Follow करते हैं,
ऐसा क्यों ?
क्योंकि आजकल पत्नियां पतियों से ज्यादा धर्मध्यान करतीं हैं,
इसीलिये उनका बोलबाला रहता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

भक्त की प्रार्थना से खुश होकर देव प्रकट हुये,
वरदान मांगने को कहा पर शर्त यह थी – जो भी तुम्हें दुंगा, उसका दुगना पड़ौसी को मिलेगा ।
भक्त ने मांगा – मेरी एक आंख फूट जाये ।

क्रोध से बचने के उपाय –

  • विलम्ब करें ।
  • कारणों और औचित्य पर विचार करें ।
  • सकारात्मक सोचें ।
  • वातावरण को हल्का बनाऐं ।

मुनि श्री क्षमासागर जी

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