बहुत अच्छे तथा बहुत बुरे में भी कई समानताऐं होती हैं ।
जैसे बहुत कम प्रकाश में दिखता नहीं है, बहुत ज्यादा प्रकाश में भी नहीं दिखता है ।
बहुत कम Frequency सुनायी नहीं देती है, बहुत ज्यादा भी नहीं ।
बहुत बुरों में से उन बातों को ग्रहण कर सकते हैं ,जो अच्छों में भी हैं ।
जब ऐसा दॄष्टिकोण होगा तब हम – बुराई से दूर रहेंगे और बुरों से घृणा नहीं करेंगे ।
(श्री गौरव)
See a mistake as just a mistake,
not “my” or “his” mistake.
“My” brings guilt,
“HIS” brings anger,
only “MISTAKE” brings realization & likely improvement…….
(Mr. Mehul)
एक आदमी सत्संग से हमेशा दूर भागता था, गुरू को आगे आगे के समय देता रहता था । एक दिन वह मर गया, गुरु शमशान घाट पर उसे सत्संग सुनाने लगे ।
लोग हँसने लगे और बोले – मुर्दा क्या सुनेगा ।
गुरू – मुर्दे के बहाने तुम ज़िंदों को सत्संग सुना रहा हूँ ।
ऐसे ही समय निकल जायेगा, समय रहते सत्संग कर लो ।
‘इस धरा का, इस धरा पर सब धरा रह जायेगा ।’
सड़क पर किसी की पिटाई हो रही है ।
पिटने वाले का पापोदय, पीटने वाले निमित्त ।
पर आप क्यों नहीं बने निमित्त ?
आपका पुण्योदय चल रहा था या आपका पुरूषार्थ इतना प्रबल था कि पीटने के Temptation को रोक पाये ।
बुरे काम में निमित्त ना बनें, अच्छे काम में निमित्त जरूर बनें ।
चिंतन
एक राजा ने दो विद्वानों की खूब तारीफ़ सुनी। उसने दोनौं को अपने महल में बुलाया ।
एक विद्वान जब नहाने गया तो राजा ने दूसरे के बारे में पहले से उसकी राय पूंछी ।
पहला विद्वान – अरे ! ये विद्वान नहीं, बैल है ।
ऐसे ही राजा ने दूसरे से पहले के बारे में राय जानी ।
दूसरा विद्वान – ये तो भैंस है ।
जब दौनों विद्वान खाना खाने बैठे तो थालियों में घास तथा भूसा देखकर चौंक पड़े ।
राजा ने कहा – आप दोनौं ने ही एक दूसरे की पहचान बतायी थी, उसी के अनुसार दोनौं को भोजन परोसा गया है ।
दौनों की गर्दन शर्म से झुक गयी ।
रत्नत्रय 2
पीले पत्ते तो पुरवया की बयार में भी गिर जाते हैं ।
( कमजोर पत्ते तो सुहावनी हवा में भी टूट जाते हैं । निर्बलता तो अभिषाप है )
‘धर’ मतलब है रखना और ‘म’ मतलब है में ।
जब हम स्वयं को स्वयं में रखना शुरु कर देते हैं तो वहां से हम धर्म में प्रवेश कर जाते हैं ।
(कु. अज्ञा खुर्देलिया)
आपको शराब और शर्बत Offer किए जाये तो Selection आपके हाथ में है ।
यदि शराब पी तो नशा आएगा ही, थू थू होगी ही ।
कर्म करने से पहले Choice आपके हाथ में है, करने के बाद फल आपके वश में नहीं है ।
ज़िंदगी के पहले कपड़े (लंगोटी) में ज़ेब नहीं होती;
आखिरी कपड़े (कफ़न) में भी ज़ेब नहीं होती ।
फिर क्यों हम अपनी ज़िंदगी को ज़ेब भरने में बरबाद कर रहे हैं ?
चिंतन
Ten Words………………
AVOID IT
USE IT
OVERCOME IT
VALUE IT
KEEP IT
IGNORE IT
ACHIEVE IT
DISTANCE YOURSELF FROM IT
ACQUIRE IT
MAINTAIN IT.
(Mr. Sanjay)
चलनी ने सुई से कहा कि तेरे मुँह में छेद है ।
सुई – अपनी ओर तो देख ले, तेरे तो पूरे शरीर में छेद ही छेद हैं ।
जो अकल की बात को अकल में बैठा ले, वह अक्लमंद।
बुद्धू को अकल की बात बताओ तो उल्टा पड़ जाता है ।
तुम क्यों बता रहे हो ?
क्या मुझ में अकल नहीं है ?
क्या हम सब भी गुरूओं/भगवान की बातों को उल्टा नहीं ले रहे ?
चिंतन
मोक्षमार्ग दो ही हैं ।
1. साधना
2. आराधना
जब तक साधना नहीं कर पा रहे हो, तब तक आराधना तो करो ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
बाहर का कचड़ा ( अपशब्द, Criticism ) झेलने की आदत ड़ाल लो,
अंदर का कचड़ा अपने आप साफ होने लगेगा ।
चिंतन
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments