अपने स्वार्थ से यदि परमार्थ की भी सिद्धि हो रही हो तो यह अच्छा ही है ।
जैसे सामुहिक स्वाध्याय तथा बच्चों को संस्कार देते हुये पालना ।

चिंतन

संसारी जीव संसार के चक्कर को चक्कर ना मान कर शक्कर मान रहा है ।
मीठे का आदी हो जाने के कारण यथार्थ को भी नहीं मानता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

गुरू श्री के पास एक सज्जन आए और पैर छूने लगे ।
गुरू श्री – यदि तुम लड़के हो तो पैर छूलो, यदि लड़की हो तो मत छूना ।
(क्योंकि उनके पहनावे से यह पता नहीं लग रहा था कि वह लड़के थे कि लड़की )

श्री विमल चौधरी

एक दिन अकबर ने बीरबल से कहा की तुम इतने होशियार हो तो तुम्हारे पिता कितने होंगे, कल उन्हें दरबार में लेकर आओ । पिता तो इतने होशियार थे नहीं , पर बीरबल ने उनको एक गुर सिखा दिया ।
अगले दिन अकबर बड़े बड़े प्रश्न लेकर तैयार बैठा था, प्रश्न किया पर पिताश्री मौन रहे और मुस्कुराते रहे ।
अकबर ने बीरबल से पूछा – ये मेरे प्रश्नों का ज़बाब क्यों नहीं दे रहे हैं ?
बीरबल ने कहा – खता माफ़, ये बेवकूफों से बात नहीं करते ।

हम दुनियासे क्यों बात करते हैं ?

आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी

माँ काम करते समय बच्चे को दूर रखने के लिये खिलौना दे देती है, वह मग्न हो जाता है ।
वैभव भी खिलौना है, जिसे मिला वह प्राय: जिनवाणी माँ से अलग हो जाता है ।
जब माँ पास बुलाना चाहती है तो खिलौना छीन लेती है, गोदी में ले लेती है ।

वैभव छिनने पर यही सोचें कि जिनवाणी माँ अपने पास बुला रही है ।

जाप, पूजा आदि बैठकर या ख़ड़े होकर करने के लिये क्यों कहा है ?
बैठने से 90 Degree का Angle बनता है, लेटने से “0” Degree का ।
यदि हम अपना ध्यान / Efficiency 90% (100% जो आजकल हो नहीं सकती ) रखना चाहते हैं तो बैठकर या ख़ड़े होकर करें ।

चिंतन

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