धर्म की राह पर प्रगति करना चाहते हो ?
- यदि नहीं, तो बात खत्म ।
- यदि हाँ, तो –
- Admit करें की आपमें कमजोरियाँ हैं ।
- उनकी List बनायें ।
- किसी गुरू की तलाश शुरू करें ।
गुरू –
A – जो श्रद्धा, ज्ञान, चारित्र में आपसे श्रेष्ठ हों ।
B – जो आपको समय दे सकें । - उन्हें Weaknesses की List बताकर उन्हें दूर करने के उपाय के बारे में Discuss करें ।
- अभ्यास करें । गिरेंगे, गिरने से सीख लें, उठें, फिर चलें ।
- गुरू को Regularly Visit करें, उनके Touch में रहें । उन्हें बतायें – क्यों गिरे, क्या सीखा, प्रायश्चित लें ।
- धार्मिक और ईमानदार लोगों की संगति रखें ।
मोक्षमार्ग प्रशस्त होगा ।
चिंतन
अति ( Excess ) के बिना इति ( Goal ) से साक्षात्कार करना संभव नहीं,
पीड़ा की अति ही, पीड़ा की इति/End है,
पीड़ा की इति ही, सुख का अर्थ है,
पीड़ा को सहना ही, वास्तविक और सात्विक सुख है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
रिश्ते और रास्ते एक सिक्के के दो पहलू हैं,
कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते बदल जाते हैं,
कभी रास्ते पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं ।
(श्रीमति उदया)
भगवान, गुरु, धर्मावलंबियों से Relations – सम्बंध कहलाते हैं ।
संसारी लोगों से Relations – अनुबंध/करार ( Agreement ), मतलब के ,फ़ायदे/नुकसान के होते हैं ।
सबसे बडा शत्रु – चुगली करने वाला, क्योंकि वो दो प्राणीयों के भाव खराब करता है।
अत: कम से कम चुगली ना सुनने का नियम ले लेना चाहिए, जो कि आसान है ।
बाई जी
सफ़ेद कैनवास पर छोटा सा काला धब्बा लगाकर पूछने पर कि क्या दिखा ?
सब यही कहेंगे कि काला धब्बा दिखा ।
इतना बड़ा सफ़ेद कैनवास नहीं दिख रहा और छोटा सा काला धब्बा दिख रहा है क्योंकि,
हमारी प्रकृति ही बुराईयों को देखने की है ।
( Dr. P. N. Jain )
Kite rise highest against wind, not with it.
अनंतानुबंधी ( अति तीव्र कषाय ) :- अपनी सीट और साथ वाली भी घेर लेना।
अप्रत्याख्यान ( तीव्र कषाय ) :- अपनी सीट पर ही बैठना।
प्रत्याख्यान ( मध्यम कषाय ) :- अपनी सीट पर किसी दूसरे को भी बैठाना।
संज्वलन ( मंद कषाय ) :- अपनी सीट किसी दूसरे को दे देना।
श्री लालमणी भाई
जब मेघनाथ गर्भ में थे, तब रावण ने ज्योतिषी से पूछा – यह बच्चा मृत्यु पर विजयी कैसे होगा ?
ज्योतिषी ने कहा – जब 9 ग्रह बीच के घर में आ जायेगें ।
रावण सब ग्रहों को पकड़ लाया और बीच के घर में बैठा दिया । जब पता लगाने गया कि बच्चा हुआ या नहीं । इतने में शनि थक था और उसने अपना पैर चौथे घर में फैला दिया ।
कितना भी कर्मों को समेटो, कहीं ना कहीं से खिसक ही जाते हैं ।
श्री लालमणी भाई
नियम तो सब लोग लेते हैं – पर ‘किंतु’ ‘परन्तु’ लगाकर ।
नियम मैं निभवा दूंगा, ‘किंतु’ ‘परन्तु’ तुम निभालो ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
दो लोगों ने बराबर की Tax की चोरी की, एक के घर Raid पड़ गयी, पेपर्स पकड़े गये , सज़ा मिल गयी । दुसरे ने Raid से पहले पेपर्स जला दिये, सज़ा नहीं मिली ।
दुसरे के पास 3 Choice हैं –
1. आगे भी चोरी करता रहे :- कभी ना कभी पकड़ा जायेगा – बड़ी सज़ा मिलेगी ।
2. चोरी करना बंद करे :- पकड़ा नहीं जायेगा, सज़ा नहीं मिलेगी । पर कर्म बंध तो होगा, किसी न किसी रूप में आगे भुगतना भी पड़ेगा ।
3. चोरी बंद कर दे, प्रायश्चित करें, पैसे को दान पुण्य में लगायें – हो सकता है उसकी सज़ा माफ़ हो जाये ।
चोर तो हम सब हैं, कोई छोटा चोर कोई बड़ा चोर । पर पहले, दूसरी Category के चोर रहें, फिर तीसरी के, तभी कल्याण होगा ।
चिंतन
क्रोध Control करने के गुर :-
- Postponeकरें ।
- गहरी सांस लें ।
- शीशा देखें – आप उस समय कैसे लगते हैं ।
- ठंडा पानी पीयें ( आग पानी से ही बुझती है ) जिससे Adrenaline हारमोन्स Dilute होते हैं ।
- कारण ढ़ूढ़ें – क्यों सामने वाले ने ऐसा व्यवहार किया ?
- संकल्प लें – क्रोध नहीं करेगें ।
- अपेक्षायें ना रखें ।
- रचनात्मक कार्यों में लगें ।
अपनी गुस्सा लेकर कहीं और ना जाया जाये,
घर की बिखरी हुई चीजों को सजाया जायें ।
- कल्पना करें जिस पर गुस्सा कर रहे हैं, उसकी जगह मेरा सबसे प्रिय व्यक्ति होता तो !
- क्षमा भाव रखें, भगवान से प्रार्थना करें कि आपका क्रोध शांत रहे ।
श्री दुग्गल जी दिल्ली में बैंक के वरिष्ठ अधिकारी थे।
उनको कैंसर हो गया और बम्बई इलाज के लिये आते थे।
अस्पताल वालों ने विदेश से कोई ज़रूरी इंजेक्शन मंगाया और उसके लिये दुग्गल जी को दिल्ली से बुलवाया। जब वे मुम्बई पहुंचे तो वह इंजेक्शन बहुत ढ़ूँढ़ने पर भी न मिला। कई दिन इंतज़ार करते रहे और तबियत खराब होती गई तब उन्होंने डॉ पी एन जैन को फोन किया । इस पर डॉ जैन दुर्व्यवस्था से बहुत दुःखी हुये। तब दुग्गल जी ने कहा – दुःखी न हों, ये शेर सुनें –
“ख़ुदा की हुकूमत में, हरसू अमल है,
तफ़्कीर में जान अपनी क्यों खोता।
हुआ जो है अकबर, समझ तू ज़रूरी,
ग़र ज़रूरी न होता, तो हरगिज़ न होता।”
(तफ़्कीर = फिक्र )
शेर सुनाने के अगले दिन श्री दुग्गल जी का निधन हो गया ।
क्या ऐसी मुसीवतों में हम समता भाव रखते हैं ?
If you are going through hell, keep going.
Mr.Winston Churchill
(यदि रुक गए/ अटक गये तो नरक की यातना लगातार झेलनी पड़ेगी)
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments