किसी भी बड़ी से बड़ी मशीन का छोटे से छोटा पुर्ज़ा भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना बड़ा पुर्ज़ा ।
हर पुर्ज़ा अपना role पूरी efficiency से निभाता है तभी मशीन सही चल पाती है ।

इस दुनिया को चलाने में भी छोटे से छोटे आदमी का role, मशीन के छोटे पुर्ज़े की तरह ही महत्वपूर्ण है ।
यदि एक आदमी भी अपना role अपना कर्तव्य, सही नहीं अदा करेगा तो उसका असर आस-पास के सारे माहौल पर पड़ेगा ।

श्री नियाज़ अख्तर

जीवन बांसुरी जैसा है,
जिसमें बहुत से छेद (कमियाँ) हैं,
अंदर से खोखली है (सार नहीं है) ।

यदि सही छेद को, सही समय पर ऊँगली रखकर दबा दिया जाये,
तो इसी खोखलेपन से धर्म का / मोक्ष का मधुर संगीत निकलने लगता है ।

यदि विद्या पूर्ण रूप से हासिल नहीं की, तो काम नहीं चलेगा ;
जैसे अभिमन्यु अधूरी विद्या  से मारा गया ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

एक ब्रम्हचारी जी कुछ हरी सब्जियों को रख कर बाकी का त्याग कर देते थे,
और भोजन से पहले हाथ उठा कर बोलते थे  – हे बाकी सब्जियों तुम निश्चिंत रहो, तुमको अभयदान देता हूँ ।

एक किसान रोजाना अपनी पत्नी को पीटता था,
गुरू ने कहा – ज्ञाताद्रष्टा बन जाओ,
इस तरकीब से किसान पत्नी को पीट नहीं पाता था ।
किसान परेशान रहने लगा और एक दिन उसने तरकीब लगाई कि हल में एक बैल को तो एक तरफ़ से लगाया और दूसरे को दूसरी तरफ़ लगा कर खेत जोतने लगा ।
पत्नी ने देखा और ज्ञाता-द्रष्टा का मंत्र याद कर कुछ नहीं बोली और किसान उसकी पिटाई नहीं कर पाया ।

यदि ज्ञाता-द्रष्टा बनें तो कर्म हमारी पिटाई नहीं कर पायेंगे

पं. रतनलाल जी -इन्दौर

Archives

Archives

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930