कम खाना, कम सोचना, कम दुनिया से प्रीति।
कम कहना मुख से वचन, यही साधू की रीति।।

मुनि श्री योगसागर जी

अनुकूलताओं में यदि ज्यादा खुश हुये तो प्रतिकूलताओं में ज्यादा दुःखी होंगे ही ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

दवा की शीशी पर पूरे Ingredients , बीमारी का नाम तथा लेने की विधि लिखी रहती है,

फिर  भी Under Direction Of Doctor लिखा जाता है ।

शास्त्रों में सबकुछ लिखा होने के बावजूद भी गुरू के Direction की आवश्यकता है ।

मुनि श्री क्षमासागर जी

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