लोभ को पाप का बाप क्यों कहा ?
क्योंकि लोभ के लिये अपमान को पी जाते हैं,
लोभ से ही मायाचारी आती है,
लोभ असफल होने पर क्रोध आता है ।

आर्यिका श्री स्वस्तिभूषणमति माताजी

कुसंगति के प्रभाव से बचे रहने के लिये बहुत पुरुषार्थ करना होता है।
लेकिन सुसंगति के बावजूद व्यक्ति बिगड़ जाए तो पुरुषार्थहीन ही कहलायेगा।
ऐसे वातावरण में यदि प्रगति नहीं की तो पुरुषार्थ की भारी कमी।

चिंतन

भिखारी वह जो इच्छा रखता हो/ जिसकी इच्छा पूरी न हुई हो।
आदर्श भिखारी…. शांति की इच्छा रखने वाला, शांति मिल जाने पर इस इच्छा को भी छोड़ने को तैयार।

क्षु.श्री जिनेन्द्र वर्णी जी

पानी अग्नि के सम्पर्क से गर्म तो हो जाता है, पर स्वाद आदि गुण नहीं बदलते हैं।
जुआरी की संगति से युधिष्ठर जुए में सब कुछ हारे पर अन्य गुण प्रभावित नहीं हुए।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

अवतारवाद → ऊपर से नीचे तथा नीचे से ऊपर।
उत्तीर्णवाद → नीचे से ऊपर ही (मनुष्य से भगवान, बनने की प्रक्रिया जैसा जैन-दर्शन में)

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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April 8, 2022

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