“…विनती हमारी है बड़े बाबा, विद्या गुरु मिल जाएँ…” – भजन (ब्र. सलौनी)।
प्रश्न… गुरु तो स्वर्ग में, कैसे मिलें ?
1. हम ऐसा पुण्य करें कि उनसे स्वर्ग में मिलें।
2. उनके प्रतिरूप मिल जाएँ (आचार्य समयसागर जी के रूप में मिल भी गए हैं)।
चिंतन
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विघा गुरु मिल जायें को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः उपरोक्त गुरु से मिलने के लिए पुण्य की आवश्यकता है।आज विघासागर महाराज जी नहीं है लेकिन आचार्य श्री समय सागर महाराज जी उपलब्ध हैं। अतः इसके लिए पुण्य को गाढ़ा करना परम आवश्यकता है।
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विघा गुरु मिल जायें को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः उपरोक्त गुरु से मिलने के लिए पुण्य की आवश्यकता है।आज विघासागर महाराज जी नहीं है लेकिन आचार्य श्री समय सागर महाराज जी उपलब्ध हैं। अतः इसके लिए पुण्य को गाढ़ा करना परम आवश्यकता है।