Day: May 9, 2026

निकाचित

निद्यत्ति निकाचित देवदर्शन से समाप्त। दूसरे मतानुसार आठवें गुणस्थान में। दोनों मतों में सामंजस? चौथे से आठवें गुणस्थान में? प्रथमानुयोग/चरनुयोग से चौथे ग्य्णस्थान में करणानुयोग

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पुरुषार्थहीन

जिनको लगता है कि उनके फैसले रब करेगा, वे बैठे हैं कि अब करेगा – अब करेगा। (ब्र. डॉ. नीलेश भैया)

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मंगल आशीष

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