Month: March 2026
प्रमाद / हिंसा
कोई व्यक्ति सिर्फ बैठा है, इसमें हिंसा कैसे घटित होगी ? प्रमाद में बस बैठने से अपने समय/ मन का दुरुपयोग कर रहा है। भाव/
भाग्य / पुरुषार्थ
भाग्य / पुरुषार्थ… एक प्रसिद्ध ज्योतिषी ने मेरी उम्र 62 वर्ष बतायी थी। फिर थोड़ा धर्म/ अनुशासित जीवन किया तो 72 वर्ष पर आ गया।
ऋषभनाथ भगवान
ऋषभनाथ भगवान का चिन्ह बैल नहीं, क्योंकि बैल तो नपुंसक होता है। उनका चिन्ह है “वृषभ” (सांड़)। मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी
मौन
मौन… म (मन) + ऊन (कम करना)। मौन में मन को कम होना चाहिये। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
श्रावक / आत्मानुभव
जब तक बाह्य दृष्टि रहेगी, अंतरंग पर दृष्टि/ आत्मानुभूति कैसे हो सकती है ? श्रावक बाह्य से दृष्टि हटा नहीं सकता। चिंतन
मोह
जैसे कीचड़ से कीचड़ नहीं धुल सकती है, वैसे ही मोह से मोह धुलता नहीं है, बल्कि बढ़ता ही है। क्षु. श्री सहजानंद जी
मैं
जिसमें मेरी आत्मा नहीं, वह “मैं” नहीं। (जैसे मकान, रिश्तेदार आदि) क्षु. श्री सहजानंद जी
Who you are ?
Committing yourself is a way of finding out who you are. A man finds his identity by identifying. Robert E. Terwilliger
आत्मा
आत्मा एकत्व(अपने में पूर्ण लीन), विभक्त(अन्य से भिन्न) रूप है। क्षु. श्री सहजानंद जी
धोखा
धोखे से कमाये गये धन को पुण्य में लगाने पर पुण्य उसको मिलेगा जिसको धोखा दिया गया था। गुरु गोविन्द सिंह
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