Month: March 2026
कायक्लेश
कायक्लेश…. चलाकर(बुद्धिपूर्वक) काय को क्लेश देना। बाईस परिषहों में से एक। तप का भेद। उपसर्ग अचानक आते हैं, परिषह के लिये पहले से तैयार रहते
कर्मफल
मौसमी के 6-7 फ़ीट के पेड़ पर हज़ारों फूल लगे। बाद में सैकड़ों छोटी-छोटी मौसमी की गाँठें सी बन गयीं। चिंता हुई कि ये छोटा
विद्या गुरु मिल जायें
“…विनती हमारी है बड़े बाबा, विद्या गुरु मिल जायें…” – भजन (ब्र. सलौनी)। प्रश्न… गुरु तो स्वर्ग में, कैसे मिलें ? 1. हम ऐसा पुण्य
जीवन का उद्देश्य
जीवनोद्देश्य… जिनादेश* पालन अनुपदेश…..अन्य का उपदेश नहीं आचार्य श्री विद्यासागर जी * भगवान का आदेश
निर्माल्य
माली मेहनत करता है, बदले में मेहनताना निर्माल्य में नहीं आयेगा। मन्दिर का सामान/ दुकान आदि हड़पना निर्माल्य में आयेगा। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
मूल / भूल
मूल पर नज़र न रखना ही बड़ी भूल है। मूल पर नज़र तभी जाती है जब नज़र शुद्ध हो। नज़र शुद्ध कैसे हो ? नज़र
बंध के हेतु
बंध के हेतु…. सिद्धान्त ग्रन्थों के 3 हेतु…राग, द्वेष, मोह। अन्य ग्रन्थों में 4 हेतु……. मिथ्यात्व, अविरति, कषाय, योग। तत्त्वार्थ सूत्र में 5 हेतु……. मिथ्यात्व,
स्वभाव
Boss के Boss तक मेरे मित्र ने मेरे खिलाफ शिकायत की। मैं Boss के पास जाकर दु:खी हुआ। Boss… ये तो तुम्हारे हित में हुआ
बच गये या मर गये
एक प्रसिद्ध फ़िल्म में डाकुओं के सरदार ने तीन डाकुओं को गोली मारी पर तीनों बच गये, तीनों बहुत खुश हुए। अचानक सरदार ने तीनों
गुरु
आपका स्मरण रहे, संसार का विस्मरण रहे। गुरु ने मुझे गुरु समय दिया, लघु बनने के लिये। आचार्य श्री विद्यासागर जी
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