Month: March 2026

चोरी

परमार्थ में चोरी… “पर” को अपना मानना। क्षु. श्री सहजानंद जी

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संगति

संगति… गंगा का शुद्ध जल भी नाली में गंदा हो जाता है। चिंतन

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भक्ति

शुद्धोपयोग में शुद्ध की अनुभूति, भक्ति में भगवान बनने की। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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शुभ-लाभ

शुभ… यानी अशुभ से दूर। लाभ… यानी फायदा –> संसार में धनादि का (धर्म में आत्मकल्याण का)। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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अनर्थदण्ड विरत

अनर्थदण्ड विरत = मन, वचन और काय की कुचेष्टाओं का त्यागी अनर्थ = निष्प्रयोज्य दण्ड = मन, वचन और काय की कुचेष्टायें विरत = उदासीन,

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घमंड

हम इन्द्रियों का बहुत घमंड करते हैं। कानों से सुने, आँखों से देखे को ही सही मानते हैं। क्षु. श्री सहजानंद जी</span

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पद्मासन मूर्ति

प्राय: पद्मासन मूर्तियाँ क्यों ? तप भी इसी मुद्रा में ? पैर जमीन से नकारात्मक ऊर्जा लेते हैं। पद्मासन में पैर तथा हथेलियाँ ऊपर की

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Jainism

Jainism –> “How to Live” ही नहीं, “How to Die” भी है। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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साता

असाता से साता में जाने का तरीका –> पूजा, स्वाध्याय आदि का कोटा तय मत करो, समय की सीमा बना लो जैसे एक मुहूर्त पूजा

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धनवान

आचार्य मानतुंग के अनुसार धनवान वह जो अपने धन का उपयोग धनहीनों को धन, पुण्यवानों को आहार दानादि, बराबर वालों को सहयोग प्रदान करता हो।

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मंगल आशीष

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March 6, 2026