एक निवाला पेट तक पहुंचाने का…नियति  ने क्या ख़़ूब इंतजाम किया है…
अगर गर्म है, तो हाथ बता देते हैं ;
सख़्त है, तो दांत ;
कड़वा या तीखा है, तो ज़ुबान ;
बासी है, तो नाक बता देती है ;

बस मेहनत का है या बेईमानी का !…
इसका फैसला आपको करना है…!!

(मंजू)

मांगने पर तो मूल्यहीन वस्तुयें ही मिलतीं हैं जैसे भीख ।
बिनमांगे मूल्यवान जैसे वृक्ष से छाया/ अग्नि से उष्णता/ वर्फ से शीतलता/ फूल से सुगंधि तथा भगवान से कृपा,
बस उनसे निकटता बनानी होगी ।

माँ सोचती है… बेटा आज भूखा ना रहे,
पिता सोचता है कि बेटा कल भूखा ना रहे ।
बस यही दो सम्बन्ध ऐसे हैं संसार में, जिनका दर्जा भगवान् के बाद में आता है..!

????जय जिनेंद्र????

(सुरेश)

संसार ज़रूरत के नियम पर चलता है…

सर्दियों में जिस सूरज का इंतज़ार होता है,
उसी सूरज का गर्मियों में तिरस्कार भी होता है ।
अतः आपकी कीमत तब होगी,
जब आपकी ज़रूरत होगी ।

????????(धर्मेन्द्र)????????

और ज़रूरत होती है…गुणों से ।

????????????????????????????????????????
“चाबी” से खुला “ताला” बार बार “काम” में आता है,
और
“हथौड़े” से “खुलने” पर दुबारा काम का नहीं रहता ।

इसी तरह “संबन्धों” के ताले को “क्रोध” के “हथौड़े” से नहीं बल्कि “प्रेम” की “चाबी” से खोलें।
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(सुरेश)

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