निमित्त मिलने पर, नैमित्तिक-भावों से क्रोध आता है ;
ये निमित्त बाह्य या अंतरंग भी हो सकते हैं ।
2) क्रोध अज्ञानी को ही आता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

बीज मिट्टी में दब कर सहता है तभी विशाल वृक्ष बनता है ।
जिस कंडक्टर ने गांधी जी को बेईज्ज़त करके ट्रेन से उतारा, उसका नाम कोई नहीं जानता, गांधी जी विश्व-विख्यात ।

मान्यतायें सबकी अलग अलग हो सकती हैं ।
सही/गलत का निर्णय प्रयोग (चारित्र) से ही हो सकता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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