दुश्मन की मारी हुई “गोली” तो हम फौरन निकलवा देते हैं,
फिर “बोली” क्यों नहीं !
रात भर का अंधेरा सूर्य की पहली एक किरण से तथा वर्षों का अंधकार एक छोटे से दीपक के जलाने से समाप्त हो जाता है ।
दायित्व निभाओ, ओढ़ो मत ।

(मंजू )
जिसके बिना बोले मोक्षमार्ग प्रशस्त हो जाये ।
पुण्य का फल मीठा लगता है/होता है,
पर उसकी गुठली पाप रूप होती है ।
धर्म को Washing Powder ना मानें कि पहले प्रयोग करें फिर विश्वास करें,
बल्कि बीमा जैसा मानना – “जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी”
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
पानी कितना भी मैला हो, प्यास बुझाने लायक ना हो ;
पर आग तो बुझा ही देगा ।
(सुरेश)
रिश्तेदार, Emergency में /लिहाज़ में तो आते ही हैं ।
Vision is the art of seeing the invisible.
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का सर्वोत्तम विचार…
“दर्पण में मुख और संसार में सुख, होता नहीं है,
बस दिखता है”
( ब्र. निलेश भैया )

(एकता )
एक जुट हों,
एक से जुड़ें नहीं,
बेजोड़* बनें ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
* अपूर्व/अखंड/बिना जोड़/मतभेद रहित
सब को शौक है, दरारों से झांकने का;
दरवाजा खोल दो तो कोई हाल तक नहीं पूछता..!
(सुरेश)
ज़रा सी बात से मतलब बदल जाते हैं…
उंगली उठे तो बेइज्ज़ती????????
अंगूठा उठे तो तारीफ़ ????????
और
अंगूठे से उंगली मिले तो लाज़बाव????????
यही तो है ज़िंदगी का हिसाब ।
(विश्वकर्मा)
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