Raise your words, not voice.
It is rain that grows flowers, not thunder.

Jalaluddin Rumi

हर चक्की वाला अपनी चक्की सप्ताह में एक दिन बंद रखता है, तुम अपनी चक्की हर दिन, हर समय क्यों चलाते रहते हो ?

आचार्य श्री विद्यासागर जी

आचार्य श्री विद्यासागर जी कभी भी अपने शिष्यों की गलतियों को बताते नहीं, सिर्फ इशारा कर देते हैं ।
शिष्य खुद गलती स्वीकार कर प्रायश्चित माँगें, तब देते हैं ।

वादविवाद में अटकन है/ठहराव है,
भक्ति में गति ।
जिसके प्रति भक्ति की जायेगी, गति वहीं तक होगी जैसे दुकान के प्रति तो वहाँ तक, भगवान के प्रति तो मंदिर तक, रागी के प्रति तो उस व्यक्ति तक, असीम/वीतरागता के प्रति तो मोक्ष तक ।

चिंतन

हर समय/हर बात के लिये सहारा लेने वाले जल्दी ही बेसहारा हो जाते हैं ।
जो हारा वह सहारा लेता है, दूसरों के सहारे कोई जीतता नहीं है ।
ख़ुद का सहारा लेने वालों को ख़ुदा भी सहारा देता है ।

चिंतन

10 kg पंख या 10 kg पीतल में से क्या ढोना पसंद करोगे ?
पीतल
क्यों ?

  • ढोने में आसानी
  • लोगों की नज़र में कम आयेगा

पाप भी पंख जैसा होता है-
ढोने में कठिन,
लोगों की नज़र से छुपाना भी कठिन ।

(तोषिता)

जिसको भी गलत तस्वीर दिखाई , उसे ही खुश रख पाया मैं ;
दर्पण दिखाने पर तो , सारे ही रुठ गये मुझसे ।

(श्री तुषार)

दर्पण अपनी ओर रखो, पीछे का भाग दूसरों की ओर ;
अपना कल्याण , दूसरे खुश ।

चिंतन

इति + हास = वह भूतकाल जो हँसी का पात्र है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

(जन्म जन्मांतरों में किया क्या है ?
जीवनों को यों ही गंवाते आये हैं ।)

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