To taste the Sweetness Of Life,
you must leave the bitterness of the past.

(Dr. Sudheer)

घड़े में जरा सी दरार पड़ जाये तो सारी छाछ निकल जाती है पर मक्खन घड़े में ही बना रहता है ।

हमारी श्रद्धा भी मक्खन जैसी होनी चाहिए ,जो छोटी मोटी दरार से ना निकलने पाये ।

चिंतन

कहते हैं – ऊंट एक तिनके के बोझ से बैठ जाता है ।

(वो तिनका, जिसके बाद वो और बोझा नहीं उठा पाता)

श्री सौरभ जैन – नोएड़ा

स्वर्ग/नरक जाने का फैसला, आखरी पुण्य/पाप क्रिया तय करती है ।

जो हमारे करीब हैं और रोज का मिलना जुलना है, उन्हें हमसे शिकायत बहुत हैं ,
जो हमसे दूर हैं और कभी कभी मिलना होता है, उन्हें हमसे कोई शिकायत नहीं ।

सो नज़दीकियों से अब हमें ड़र लगता है !!

(धर्मेंद्र )

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