Category: डायरी
पूजा
पूजा 3 प्रकार की (हर दर्शन में)… 1) आराध्य की…संकल्प सहित, अर्घ स्वाहा करके आराध्य के गुणों को लेन के भाव से । 2) विशिष्ट
आतिशबाजी
बारूद को देखना भी अशुभ/ अपशगुन है । इसीलिए भारतीय-संकृति में स्वागत पुष्पवृष्टि से होता था, बंदूक/ तोप चलाकर नहीं (यह तो पाश्चात्य सभ्यता है)
दिल और दिमाग
जहाँ लाभ/हानि हो वहाँ तथा बुरे कामों के करने से पहले दिमाग लगाओ, घर परिवार के और अच्छे काम दिल से करना चाहिए ।
पूजा और आचरण
पूजा करने वालों के आचरण नहीं आता तो पूजा का क्या फायदा ? पूजा का तभी तक फायदा, जब तक जीवन में आचरण ना आये;
बटुआ और आदमी
बटुआ उधारी के पैसों से भी फूल जाता है, हालाँकि आदमी के पास भी सब कुछ उधारी का है/थोड़े समय के लिये है, पर आदमी
ज़िद / द्रढ़ता
द्रढ़ संकल्प सच्चे लक्ष्य के प्रति होता है, ज़िद अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए होती है, इसीलिये कहते हैं कि ज़िद्दी रद्दी होता है ।
वक़्त
वक़्त का इंतज़ार करके, वक़्त बर्बाद मत करो, वक़्त का सदुपयोग करके, अपना वक़्त सुधार लो ।
पैसा
गृहस्थ का पैसा तब बहुत बुरा, जब बुरे काम में लगे, बुरा, जब किसी भी काम में न लगे । ये एक ही पाप है,
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