Category: डायरी

मोह

मोह ऐसा है जैसे मरुस्थल में सावन तो आया (दिखता/ लगता) पर पतझड़ न गया (आत्मा से मोह)। इनके पेड़ों पर सुख/ शांति के फल

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पथिक

बिना प्रमाद, श्वसन क्रिया सम, पथ में चलो। आचार्य श्री विद्यासागर सागर जी

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चरित्र

“परिहार” के दो अर्थ होते हैं एक ग्रहण करना, दूसरा छोड़ना। ग्रहण कर्तव्य का, छोड़ना अकर्तव्य का; और इन दोनों के होने से बनता है

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मैं

मैंने देखी, मैं की माया। मैं को खोकर, मैं ही पाया।। (रेनू – नयाबाजार मंदिर)

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लोगों के प्रकार

चार प्रकार के लोग…. 1) भाग्यवान… जिनके पास वर्तमान में धन वैभव हो। 2) सौभाग्यशाली… वैभव के साथ स्वास्थ्य भी अच्छा हो। 3) महा-सौभाग्यशाली… धन,

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तैयारी

घर से पर-घर जाने के लिए अच्छे कपड़े पहनते हैं। गाँव से पर-गाँव जाने के लिए तैयारी और ज्यादा, धन आदि रखना होता है। देश

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भेद-विज्ञान

आचार्य श्री अमृतचंद स्वामी ने कहा है → भेद-विज्ञान मोक्ष/ कल्याण का कारण है और इसका अभाव संसार/ अकल्याण का कारण है। एक महिला ने

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सुख / मज़ा / आनंद

शरीर को सुख, मन को मज़ा, आत्मा को आनंद। ब्र. डॉ. नीलेश भैया क्या पाप करने में भी आत्मा को आनंद आयेगा ? आर.के.जैन हाँ,

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विस्तार की कैद

एक राजा ने हिरणी के बच्चे का शिकार किया। हिरणी ने श्राप दिया → तेरा बच्चा जब स्वच्छंद घूमने लगे तब वह भी मारा जाये।

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आत्मा

शराबी ने नशे में सारे साथियों को भोजन का निमंत्रण दे दिया। सब पीछे-पीछे घर आ गये। पत्नी ने कह दिया –> वे घर में

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मंगल आशीष

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