Category: वचनामृत – अन्य

नदियों में विसर्जन

हिंदु मान्यतानुसार राजा सगर के पुत्रों की भस्म से उन्हें जीवित करने के लिये भागीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर उतारा। उनके पीछे मुड़कर देखने

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दायित्व / कर्तव्य

दायित्व सौंपा जाता है, कर्तव्य निभाया जाता है, जैसे माता पिता बच्चों के प्रति। दायित्व को निभाना कर्तव्य होता है। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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मन, दिल, दिमाग

मन –> संस्कारानुसार काम करता है, दिल –> रागादि से, दिमाग –> बाहरी Information से। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी

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प्रमाणिकता

अनुभव/ इंद्रियों पर आधारित प्रमाणिकता गलत भी हो सकती है जैसे पीलिया वाले के रंगों का अनुभव। गुरु/ शास्त्र पर आधारित ज्ञान प्रमाणिक होता है।

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कठिन ज्ञान

जो विषय कठिन हो, समझ में न आये; उसे जानने के प्रयास से पुरुषार्थ और ज्ञान में वृद्धि होती है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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दान

माताजी से प्रश्न → बड़े-बड़े लोग बड़े-बड़े दान करते हैं, हमें अनुमोदना करनी चाहिये या नहीं? (क्योंकि अधिक धन तो अधिक दोष सहित आता है)

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जिज्ञासा / समाधि

जिज्ञासा अपूर्णता से पैदा होती है या महत्वाकांक्षा बहुत हो जाने पर। जिज्ञासायें समाप्त होने पर/ संतुष्ट होना ही समाधि है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर

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निंदा

कड़वी निबोली को चींटी भी नहीं काटतीं, मीठी होने पर नोचने/ खसोटने लगती हैं। यदि आपको कोई सता रहा है/ निंदा कर रहा है तो

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मनस्वी / यशस्वी

मनस्वी (मन का स्वामी) ही तपस्वी बन सकता है। तपस्वी, तेजस्वी और तेजस्वी ही यशस्वी बनता है। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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शरीर / आत्मा

यदि शरीर को ज्यादा महत्व दिया तो आत्मा Neglect हो जाती है जैसे एक बेटे को ज़रूरत से ज्यादा महत्व देने पर दूसरा बेटा Neglected

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मंगल आशीष

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