समस्यायें रुकावट नहीं, मार्गदर्शक होती हैं कि आप सही दिशा में जा रहे हो !
गर्त में जाते/गिरते समय कोई रुकावट नहीं मिलती ।

सब विनयों में, उपचार-विनय (शिष्टाचार में) Practical है ।
इसमें 100% नम्बर सहजता से ला सकते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

स्मरण तथा पुण्यार्जन के लिये भुला-भुला कर पढ़ना चाहिये ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

विनय यानि सामने वाले के अनुकूल प्रवृत्ति करना ।
ख़ुद से पूछें…
क्या हम बड़ों/ गुरु/ शास्त्र और भगवान की विनय करते हैं ?

मुनि श्री अविचलसागर जी

जैसे सकलपारा चासनी में “पग” जाता है/चासनी उसके कण कण में समा जाती है, ऐसे ही हम अपने हठाग्रह/भौतिकता से “पग” गये हैं ।
अति के पगने पर पागल हो जाते हैं,
इसी से उन्हें पग+लिया कहना भाव-संगत लगता है ।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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