मन में विकार तो आयेंगे ही, पर मन को विकारी होने से बचाओ ।

कहते हैं – कैंचुली उतारने से सर्प विषहीन हो जाता है, हालाँकि विष तो दांतों में होता है ।
वैभव में पाप नहीं है, पर वैभव छोड़ने पर हम पाप मुक्त हो जाते हैं ।

आचार्य श्री वसुनंदी जी

1. गुरु ने सुंदर खरगोश दिया, रास्ते में ठगों के बार-बार पिल्ला कहने पर छोड़ दिया ।
2. दुर्योधन की माँ ने कहा वस्त्र उतार कर मेरे सामने आ, दुश्मन के खेमे के श्री कृष्ण के कहने से पत्ते लगा लिये, मृत्यु का कारण बना ।

हम गुरु/माँ को मानते तो हैं, पर उनकी नहीं मानते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

धर्म का प्रवाह बहुत महत्वपूर्ण है,
पर
यदि उपयोग नहीं किया तो वह बह जायेगा ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

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April 8, 2022

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