मुठ्ठी बांधे आते हैं (पुण्य लेकर; मनुष्य ही) हाथ पसारे जाते हैं (पुण्य खर्च करके),
फिर भी वैभव को मुठ्ठी में बांधे रखने की कोशिश करते रहते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

कुछ मतानुसार भगवान पापियों का नाश करने आते हैं,
अन्य मतानुसार पुण्यात्माओं के उद्धार के लिये,
पर वीतराग धर्मानुसार अपने अंदर बैठे कर्मरूपी आतंकी का नाश करके भगवान बनते हैं ।
उनको देखकर पापी तथा पुण्यात्मा अपने कर्मों को स्वयं क्षय करने की विधि सीख सकते हैं ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

थोड़ी दूर/देर की यात्रा के लिये रिजर्वेशन नहीं कराते हैं, विषम परिस्थितियाँ भी झेल लेते हैं कि थोड़ी देर की ही तो बात है ।
जीवन और जीवन में आयी परेशानियों के बारे में ऐसा क्यों नहीं सोचते ?

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

कुबड़े से घ्रणा करने में बहुत दोष है, क्योंकि उसके शरीर से घ्रणा की जा रही है ।
हत्यारे से घ्रणा करने में कम दोष है, क्योंकि उसके कुकृत्य से की जा रही है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930