जो शरीर में आत्मा नहीं देख पाते, वे ही मूर्ति में भगवान नहीं देख पाते ।
और वे ही शरीर/भोगों को पुष्ट करने में लगे रहते हैं ।

निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी

जलते हैं घी/बाती, नाम दीपक का क्यों ?
क्योंकि दीपक, घी/बाती को आधार देता है,
और आधार का महत्व क्रियावान से अधिक होता है ।

(भक्त, सच्चे देव,गुरु,शास्त्र के आधार से भक्ति करते हैं)

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

स्कूल में पढ़ाई, बाहर/आगे जाकर कमाई करने के लिये होती है ।
मंदिर में शिक्षा भी मंदिर के बाहर उपयोग के लिये ।

मुनि श्री सुधासागर जी

परीक्षा संसार की करो,
प्रतीक्षा परमात्मा की
और
समीक्षा अपनी करो ।

पर हम…
परीक्षा परमात्मा की करते हैं,
प्रतीक्षा सुख की
और
समीक्षा दूसरों की करते हैं !

???????? इंडिया नहीं भारत बोलों ????????

(सुरेश)

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930