बारूद को देखना भी अशुभ/ अपशगुन है ।
इसीलिए भारतीय-संकृति में स्वागत पुष्पवृष्टि से होता था,
बंदूक/ तोप चलाकर नहीं (यह तो पाश्चात्य सभ्यता है)

मुनि श्री सुधा सागर जी

पूजा करने वालों के आचरण नहीं आता तो पूजा का क्या फायदा ?
पूजा का तभी तक फायदा, जब तक जीवन में आचरण ना आये;
आचरण आने के बाद तो पूजा की ज़रूरत ही नहीं ।

बटुआ उधारी के पैसों से भी फूल जाता है,
हालाँकि आदमी के पास भी सब कुछ उधारी का है/थोड़े समय के लिये है,
पर आदमी तो समझदार है/ निर्जीव बटुआ नहीं है,
वो पैसा आते ही क्यों फूल जाता है !

ना + खून = जिसमें खून ना हो ।
डॉक्टर नाखून देखकर बीमारी का पता कर लेते हैं ।
पर तुम तो नाखून पर Nail Polish लगा आते हो, गुरु तुम्हारी बीमारी नहीं जान पाते ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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