ख़ुशी पैसों पर नहीं,
परिस्थितियों पर निर्भर करती है…
एक बच्चा गुब्बारा ख़रीद कर ख़ुश था,
तो दूसरा उसे बेच कर,
तीसरा उसे फोड़कर ।

(मंजू)

मुसीबतें नसैनी के टूटे डंडे जैसी होती हैं ।
जो Extra पुरुषार्थ करके चढ़ते हैं, वे जल्दी मंज़िल पर पहुँचते हैं तथा भविष्य के लिये आदत भी पड़ जाती है ।

चिंतन

नसीहत प्राय: अच्छी नहीं लगती क्योंकि उसमें कुछ छोड़ना होता है, जबकि वसीयत में मिलता है ।
जिन्होनें नसीहत सही से ली हो उन्हें वसीयत का आकर्षण नहीं रहता ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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