इस युग में पाप ज्यादा या पुण्य ?
ज्यादा कैसे ??
उत्तर…
अंधे ज्यादा या दोनों आँखों से देखने वाले ?
अपाहिज कितने ? स्वस्थ कितने ?
मुनि श्री सुधासागर जी
(यहाँ आकर हम पुण्य से ज़्यादा पाप करते हैं)
उपाय –
1) संकल्प
2) विवेक
3) ध्यान/योग
If you are insincere, it’s manipulative.
(क्योंकि sincerity तो आत्मा का स्वभाव है)
बड़े नोट को खुलवाते नहीं, छुपाकर रखते हैं ।
ऐसे ही पुण्य – छोटे मोटे कामों के लिये खर्च मत करो,
उसका प्रदर्शन भी मत करो,
लक्ष्मी का प्रदर्शन नहीं/सरस्वती का प्रदर्शन सही है ।
क्षमा आधार है (भूमि है),
अहंकार दीवार ।
गति (तीव्र), दुर्गति का कारण बनती जा रही है ।
आप अपनी अंतिम यात्रा की तय्यारी कर रहे हैं !
आप लोग मेरे शरीर की अंतिम यात्रा की ओर देख रहे हैं;
मैं संसार की अंतिम यात्रा की ओर, जो बहुत महत्वपूर्ण है ।
सो मुझे रागद्वेष कुछ नहीं दिख रहा है, सिर्फ सिध्द भगवान दिख रहे हैं ।
कर्म की अग्नि मुझे जला रही है, मैं ज्ञान और तप से कर्मों को ।
तुम लोग डूबते सूरज को देख कर रो रहे हो, मैं उगते सूरज को देख रहा हूँ ।
यहाँ के कामों को विराम, आगे के कामों की तय्यारी ।
पुण्य के उदय में गाफ़िल न हो जाउँ, सावधान हूँ ।
ॐ नमः सिध्देभ्यः
मुनि श्री चिन्मय सागर जी – 27.9.19
सत्य में व्यस्त होकर, संसार से विरक्त होना ही सन्यास है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
ज्यादातर चीजें समीप जाने पर बगैर मांगे मिल जाती हैं…
जैसे *बर्फ* के पास *शीतलता* ,
*अग्नि* के पास *गरमाहट*
और
*गुलाब* के पास *सुगंध* ,
तो भगवान् से मांगने के बजाये, निकटता बनाओ;
तब सब कुछ अपने आप मिलना शुरू हो जायेगा ।
????????आपका दिन मंगलमय हो
(सुरेश)
If you don’t believe in yourself,
then how can you expect others to believe you ?
चित्त अचेतन,
मन चेतन ।
हालाँकि धर्म में इनको अलग अलग नहीं माना है ।
(कृपया comments भी देखें)
माला में धागा, मोती से ज्यादा महत्व रखता है, पर उसमें गठानें नहीं होना चाहिये वरना मोतीयों में बिंध नहीं पायेगा/ उनको बांधकर नहीं रख पायेगा ।
बिना ग्रंथियों तथा मज़बूत धागे में पिरोयी माला को पहनने को तो सब लालायित रहते हैं, पर खुद ग्रंथी रहित और मज़बूत बनना नहीं चाहते ।
समर्पण यानि इच्छाओं का अर्पण ।
समर्पण से नदी सागर बन जाती है ।
संसार में समर्पण उसे करें जो विश्वासघात ना करे, वह भी मर्यादा (रिश्तों की) के अंदर ही ;
परमार्थ में, जो मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ाये ।
Kind Words are short and soft,
but their echoes are endless
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