ज़िंदगी समझ न आये, तो मेले में अकेला;
समझ आ जाये तो अकेले में मेला ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

देश के पतन का कारण …
स्वतंत्रता के पहले की कर्म-भूमि को हमने स्वतंत्रता के बाद भोग-भूमि में बदल दिया है ।

मुनि श्री प्रमाण सागर जी

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