ज़रा सी बात से मतलब बदल जाते हैं…

उंगली उठे तो बेइज्ज़ती????????
अंगूठा उठे तो तारीफ़ ????????
और
अंगूठे से उंगली मिले तो लाज़बाव????????

यही तो है ज़िंदगी का हिसाब ।

(विश्वकर्मा)

व्यवसाय को नौकरी से अच्छा इसलिये कहा…
क्योंकि
यह Running है (मरने के बाद भी बच्चों को मिलेगा) ।

ज्ञान, तप, नियम ऐसे ही बेहतर होते हैं क्योंकि उनका अभ्यास नियमित किया जाता है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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