स्वाभिमान में अपना तथा दूसरे का मान,
अभिमान में अपना मान तथा दूसरे का अपमान ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

दीपक दो प्रकार से जलाया जा सकता है –
1. माचिस पर तीली रगड़ करके – पुरुषार्थ
2. जलते हुए दीपक के सामीप्य से – संगति

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

शिष्य के ऊपर कालिख लग जाये तो चलेगा,
पर कालिख लगा गुरु नहीं चलेगा,
वरना
शिष्य अपनी कालिख किस दर्पण में देखेगा !
ना ही शिष्य ऐसा काम करे कि गुरु के नाम पर कालिख लग जाये ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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April 8, 2022

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